Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
एवमाभासमात्रस्य कचतोऽनिशमव्ययम् ।
सर्गादिमध्यान्तदृशो मुधैवात्रोदिताः स्थिताः ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह एकमात्र आभासस्वरूप से सर्वदा स्फुरित हो
रहे इस जगत् की जन्म, स्थिति और प्रलय की प्रतीतियाँ मिथ्या ही यहाँ उदित होकर स्थित हैं ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, यथार्थ में तो एकमात्र अविनाशी वह ब्रह्म ही सर्वत्र स्थित है