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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अत्यन्तमप्यारटतः शब्दो न श्रूयते मम । केनचित्सुरलोकेषु स्वप्नपुंस इवानघ ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे अनघ, मे वहाँ सुरलोको में अत्यन्त जोर से शब्द कर रहा था, फिर भी वहाँ जैसे स्वप्न के पुरुष का शब्द कोई नहीं सुनता वैसे ही मेरा वह शब्द कोई नहीं सुन पाता था