Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
स्वप्नानुभूतयो राम दृष्टान्तोऽत्राविखण्डितः ।
अनुभूत्यपलापं तु यः कुर्यात्तेन तेऽस्त्वलम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस तरह के अर्थ
की संभावना में स्वप्न के अनुभवपूर्ण दृष्टान्त हैँ । जो अनुभव का अपलाप करते हैं, अनुभव को
प्रमाण नहीं मानते हैं उन नैयायिको के साथ बातें करना ठीक नहीं है, व्यर्थ है (७)