Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 69
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
दोलायन्त्योऽवनौ देहं सागरान्सागराङ्गनाः ।
यथा धावन्ति धावन्ति जनता विषयांस्तथा ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्न इष्टयो को विषयोन्मुखी इष्टि स्वाभाविक हैं, यह कहते हैं
जैसे दोनों तटभूमियों पर प्रवाह को ूले के सदृश आन्दोलित करती हुई सागरांगनाएँ (नदियाँ)
सागरों की ओर दौड़ती जाती हैं, वैसे ही मोहग्रस्त जनता विषयों की ओर दौड़ती जाती है