Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
असदेव तथा नाम दृष्टं सत्तामुपागतम् ।
यथाऽसदेव सद्रूपं संपन्नमसदेव सत् ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
वास्तव में विषयों का
स्वरूप तो असत् ही है, परन्तु भ्रमसे सद्बुद्धि के कारण उसे सद्रूपता प्राप्त हुई है, अतः असल
में यह वैसा है नहीं, जैसे माया के आवरणवश सद्रूप ब्रह्म असत्-सा बन गया वैसे ही माया
के विक्षेपवश असत् सत् ही बन गया । माया में यह बड़ी पटुता है कि वह अघटित वस्तु को
घटित कर देती है