Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तमस्तमालपरशुः परशुद्धिकरं पदम् ।
सुवर्णमणिमाणिक्यमुक्तादिजनजीवितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्र,
मैं जिस तेज के रूप में परिवर्तित हुआ, वह तेज तमोरूप तमाल वृक्ष के लिए तो फरसा है, उत्तम
शुद्धिका स्थान है तथा तेजरहित सुवर्ण, मणि, माणिक आदि का लोक में समादर नहीं होता, अतः
वह तेज सुवर्णं आदिरूप जनों के आदर का हेतु है अथवा सुवर्ण, मणि, माणिक, मोती आदि के
रूप से समस्तजनों का जीवनसाधन है