Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वणिङ्मात्रे वणिग्घस्ततुलातोलनदोलितम् ।
रत्नत्वं जलकल्लोलहस्तान्दोलनमब्धिभिः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, मैं रतन बन गया । कुछ समय मेरा यह स्वरूप बाजारों में जौहरियों के हाथों से
तुलापर तोलने के कारण आन्दोलित हो उठा था तथा कुछ समय समुद्रो द्वारा जल-कल्लोलरूपी
हाथों से कम्पित किया गया था