Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
दिग्वधूविमलादर्शो निशानीहारमारुतः ।
सत्त्वं चन्द्रार्कवह्नीनां कुङ्कुमालेपनं दिवः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
दिशारूपी वधुओं के लिए तो यह तेज निर्मल
दर्पण है यानी उनको अलग अलग करके दर्शाता है, निशारूपी नीहार के लिए वायु है यानी वायु के
सदृश उनको नष्ट कर देता है, चन्द्र, सूर्य ओर अग्नि के लिए तो जीवनसर्वत्र है ओर स्वर्ग लोक के
लिए कुकुमका तिलक है