Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
ततोऽहमभवं तेजस्तेजोधारणयेद्धया ।
चन्द्रार्कतारकाग्न्यादिविचित्रावयवान्वितम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, उसके बाद-जल धारणा से विचित्र कौतुक देखने के
बाद-प्रबल तेज धारणा से मैं चन्द्र, सूर्य, तारा, अग्नि आदि विचित्र अवयवों से सम्पन्न तेज बन
गया
सर्ग सन्दर्भ
नब्बेवाँ सर्ग समाप्त डक्यानबेवाँ सर्ग तेज की धारणा से तेजरूप बनकर श्रीवसिष्ठजी ने जो सूर्य, चन्द्र, अग्नि एवं रत्न आदि के चमत्कार देखे, उनका वर्णन।