Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
यथा स्वप्ने पुरत्वेन चिदेव व्योम्नि भासते ।
तथा चिदेव सर्गादाविदं जगदिति स्थितम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इकंप्रत्ययलब्धत्वात् (इ्दं व्यवहार से उसका अनुभव होने से) इस उक्ति को स्पष्ट करते हैं /
जैसे स्वप्न में चिदाकाश ही नगर के रूपसे चिदाकाश में भासता है, वैसे ही सृष्टि के आदि में
चिदाकाश ही इस स्थूल जगत् के रूप से चिदाकाश में स्थित है