Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
न्यायेनेदमिवानेन न स्थितं वसुधातलम् ।
इदं चैवैकमेवाद्यसर्गस्याद्यमुपागतम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुवर “घट आदि
तो केवल वाणी के ही विकार हैं, वास्तव में तो वे कुछ नहीं है, मिट्टी रूप ही हैं, मिट्टी ही
सत्य है' । इस श्रुतिदर्शित न्याय से यदि देखा जाय, तो अज्ञानियों की दृष्टि से प्रसिद्ध इदंरूप
यह पृथ्वीतल है ही नहीं, किन्तु मनोरूप आदि सृष्टि का जो सूक्ष्मरूप एक ही था, वही श्रीणि
रूपाण्येव सत्यम्" इस श्रुति से उपदर्शित यों इदम् स्थूलरूप बनकर स्थित है