Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 69
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
लोकालोकमहाखातवलयोग्रास्यभीषणम् ।
अनन्तभूतसंघातपरिस्पन्दैकचेतनम् ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं
लोकालोक पर्वत के समीप में स्थित, जिसका मैंने आपसे पहले वर्णन किया है,
महाखातवलयरूप ()) उग्र मुख से भीषण हो गया । उस समय अनन्त प्राणिसमूहों का परिस्पन्दन
ही मेरा परिस्पन्दन तथा उनका एकीभूत चेतन ही मेरा चेतन हुआ