Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
स्थितोऽस्मि यत्र देशोऽसावित्यद्यैषा प्रकल्पना ।
तदा त्वहं चिदुन्मेषमात्रात्तन्मात्रकारणम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस जगह मैं स्थित हूँ, वह देश कहलाता है, यह मेरी
आज की कल्पना है । यह आप मुझसे पूछ सकते हैं कि उस समय आप कैसे रहे ? सुनिये, उस
समय मैं चिति का उन्मेषमात्र होने से केवल तन्मात्र का कारण था