Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
परमाणुकणे कान्ते संपन्नमनुभूतवान् ।
अहं चेतनमात्मानं वस्तुतोऽमलमेव खम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षण के अन्दर दीर्घकाल
की कल्पना के समान सुन्दर परमाणु के अन्दर भी दीर्घं देश की कल्पना से सम्पन्न ब्रह्माण्डात्मक
चेतन आत्मा का मैंने ही अनुभव किया, अवलोकन किया । वास्तव में तो वह आत्मा निर्मल
चिदाकाशरूप ही है