Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
शुक्रामरमहाविद्यानाशनोत्कसुरव्रजम् ।
क्वचित्किंचिच्च गर्भाङ्गकर्तनोत्कसुरेश्वरम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर जगत् में धर्म में ग्लानि न आने के कारण समस्त
जनता स्वप्रकाश ब्रह्मज्ञान से पूर्ण थी, कहीं पर तो पदार्थस्थिति पूर्वसिद्ध अवयव रचना के क्रमसे
विलक्षण ही थी