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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

अनिर्मथितदुग्धाब्धिमृत्युमत्सुरपूरितम् । असंजातामृताश्वेभवैद्यगोकमलाविषम् ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर शुक्राचार्य की मृतसंजीविनी महाविद्या पैदा करनेवाली महती तपश्चर्या में विघ्न डालने के लिए देवता उत्कण्ठित दिखाई दे रहे थे, तो कहीं पर भावी शत्रुओं के नाश के निमित्त दिति के पेट में घुसकर गर्भ के अवयवों को काटने के लिए इन्द्र उत्सुक थे