Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
तत्प्रतिबिम्बितं बाह्यान्मुकुरप्रतिबिम्ववत् ।
सत्यं तदन्तरेवास्ति चितेर्नासत्यमर्थतः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
क्यो स्रत्य-स्रा भास़ा 2 इस पर कहते हैं /
भद्र, बाह्य मुख आदि बिम्ब को लेकर जैसे दर्पण में प्रतिबिम्ब पड़ता है, ठीक वैसे ही
पूर्वानुभवजनित वासना को लेकर उस तरह प्रतिबिम्बित हुआ साक्षी चेतन उसी में विद्यमान है,
अतः अर्थतः उस अनुभविता के प्रति सत्य ही है, असत्य नहीं