Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
व्यावृत्त्यैव तथैवास्ते शिव इत्युच्यते तदा ।
चितिशक्तेः क्रिया देव्याः प्रतिस्थानं यदात्मनि ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
कूटस्थ चितिशक्तिरूप देवी की अपने स्वरूप में जो अविद्या से
प्रतिकूल स्पन्दन, जड़ आदि स्वभाव से स्थिति है, वही क्रिया कही जाती है और विद्या से
जब उसकी वास्तविक विशुद्ध अनुकूल चैतन्यरूप स्थिति हो जाती है, तब उसे शिव कहा जाता
है