Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

न चेतति क्वचित्किंचित्कश्चिच्चेत्यात्मभावतः । तेन चेतापि नास्तीव मौनमेवावशिष्यते ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

चिति के स्वयं चेत्यस्वरूप होने के कारण कहीं कोई कुछ भी नहीं चेतता यानी चिन्तन का विषय नहीं बनाता । इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, यह निश्चित है कि चेत्य और चेतनक्रियाके न होने से चेतयिता भी कोई नहीं है अर्थात्‌ चिति से भिन्न न तो चेत्य है, न चेतनक्रिया है । एकमात्र मौन ही अवशिष्ट है