Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 90
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 90 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 90
संस्कृत श्लोक
नृत्यस्फुरत्प्रतापान्तर्जगदर्थाः प्रतिक्षणम् ।
स्थितिं त्यजन्ति गृह्णन्ति बालसंकल्पसर्गवत् ॥ ९० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बालक के संकल्प का सर्ग प्रतिक्षण पूर्वस्थिति का त्याग कर अन्यस्थिति ग्रहण
करता है, वैसे ही नृत्य से चमक रहे विशिष्ट प्रताप से युक्त माया के अंदर प्रविष्ट हुए सभी पदार्थ
प्रतिक्षण परिणाम द्वारा पूर्वस्थिति का त्याग ओर अन्य स्थिति का ग्रहण करते रहते थे