Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 89
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 89 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 89
संस्कृत श्लोक
जगत्संक्षुब्धमक्षुब्धं दृश्यते स्थितिसंस्थिति ।
संचाल्यमानमुकुरप्रतिबिम्ब इवास्थितम् ॥ ८९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, अविचल अधिष्ठानरूप स्थिति में विद्यमान जगत् वस्तुतः
अक्षुब्ध ही है, फिर भी मायाक्षोभदृष्टि से क्षुब्ध-सा दीख पड़ता है, क्योकि बिम्बरूपसे अचल पर्वत
चलित होने वाले दर्पण में प्रतिबिम्बित होकर जैसे चलित होता है, ठीक ऐसा ही यह जगत् स्थित
है