Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
आदर्शप्रतिबिम्बस्थमिवाभात्यखिलं जगत् ।
तस्या वपुषि विस्तीर्णे स्वरूपिणि सरूपधृक् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त जगत् विस्तीर्णं -स्वरूपवाले उसके शरीर में दर्पण-प्रतिबिम्ब में स्थित-
सा मालूम पड़ रहा था ओर उसका रूप भी पूर्वं जगत् के सदृश ही था