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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

कल्पान्तजगदाकारं कृष्णमापूरिताम्बरम् । आकल्पं संभृतं नैशं देहेनेवोत्थितं तमः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रय के कारणरूप अदृष्त विशेषणो से उसी रूपका वर्णन करते हैं / कल्पान्त जगत्‌ के आकार के समान, आकाश को भर देनेवाला काला वह रूप देखने में ऐसे प्रतीत हो रहा था, मानों कल्पान्त का प्रत्येक रात का एकत्रित हुआ सारा अन्धकार शरीर धारण करके सामने आकर खडा हो रहा हो