Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
यस्मात्तद्व्यतिरेकेण सर्वभूतगणेष्वपि ।
अन्यन्न विद्यते किंचिद्देहात्मैव ततः स्थितः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
अब ˆकरिमात्मा“ इस द्वितीय प्रशन का उत्तर कहते हैं /
चूँकि समस्त भूतसमूहों मे उस परमेश्वर से भिन्न ओर कुछ नहीं है, इसलिए समस्त भूतगणो
की जो देह है उसी रूपसे वह स्थित है अर्थात् समस्तभूत मे अहंकारात्मक रुद्र के अभिध्यान से
ही वह देहात्मत्वाभिमानी है (४)