Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
काकुत्स्थ रुद्रनामासावहंकारतयोत्थितः ।
विषमैकाभिमानात्मा मूर्तिरस्यामलं नभः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
तथा समस्त प्राणियों को रुलाने एवं सभी शरणागत प्राणियों के रोगों को दूर भगाने में
निमित्तभूत होने के कारण रुद्रनामसे आविर्भूत है । वही प्राणियों को रुलाने में विषमाभिमानरूप
तथा प्राणियों के रोगों को दूर करने मेँ एकाभिमानरूप सम्पन्न होता है । इसकी जो मूर्ति मैंने
देखी वह निर्मल आकाशरूप ही थी