Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
संकल्पोन्मेषमात्रेण जगच्चित्रं विलोक्यते ।
तदनुन्मेषविलयि चित्रकृच्चित्तचित्रवत् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह साद्य प्रप विति का एकमात्र चमत्कार ही है, इसका उपपादन करते है /
संकल्प के एकमात्र आविर्भाव से ही यह संसाररूपी चित्र दिखाई देता है और उसके अभाव से
इस तरह विलीन हो जाता है, जिस तरह कि चित्रकार के चित्त में चित्र