Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verses 18–19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, verses 18–19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 18,19
संस्कृत श्लोक
इति संकल्प एवान्तश्चिरभावनया यथा ।
अग्रस्थदृश्योपमया सत्यतामिव गच्छति ॥ १८ ॥
तथैवायं जगद्रूपः संकल्पैः सुसमुत्थितः ।
चिच्चमत्कारमात्रात्मा चित्रकृच्चित्तचित्रवत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह संकल्प
करनेवाले का संकल्प ही अन्तःकरण में चिरकाल की भावना से जैसे सामने स्थित दृश्य के
तुल्य एक तरह से सत्यता को प्राप्त हो जाता है, वैसे ही विधाता के संकल्पो से सुसमुत्थित
यह जगद्रूपी मण्डप चिति का एकमात्र चमत्कारस्वरूप चित्रकार के चित्त में बनाये गये चित्र के
तुल्य है