Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
उपलम्भ उदेत्यादौ ब्रह्मणो वासना ततः ।
तच्छान्तिं विद्धि निर्वाणं तत्सत्तां संसृतिभ्रमम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्मा
को संसार रचने की इच्छा (00) उत्पन्न होती है । तदनन्तर पूर्वकाल की जगद्बासनाओं का जगत्-
रूपसे उद्भव होता है। इसलिए वासना की शान्ति को आप निवार्ण समझिये ओर उसकी सत्ता को
संसार रूप भ्रम जानिये