Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
मृतस्यास्ति परो लोको विदित्येवंमयी भवेत् ।
सति वाऽसति देहेऽस्मिंस्तेन किं सदसच्च किम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवितदशा में देह के उपस्थित रहने पर श्रुति आदि प्रमाण
के बल से अथवा मृतदशा में देह के उपस्थित न रहने पर स्वप्नवत् एकमात्र प्रतिभास के बल
से “परलोक है" -इत्याकारक अनुभवस्वरूप संवित् यदि अवश्य होगी ही, तो फिर उस मृत्यु से
क्या ? जीवित प्राणी के अनुभव से सिद्ध सत् है ओर मृत के अनुभव से सिद्ध असत् है अथवा
इसके विपरीत प्रकार से है, इसका अपलाप ही क्यों होगा-दोनों मेँ किसी का भी अपलाप नहीं
किया जा सकता । इस तरह श्रुति आदि प्रमाण हैं, यह सिद्ध हो गया