Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अप्रमाणतयैतस्मिन्नर्थे तेषां महामते ।
अन्यत्राणि प्रमाणत्वं वन्ध्यादावपि किं भवेत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि यह कहो कि हम देहात्मवादी चार्वाकों के मत में उन वेदादि शास्त्रों की व्यर्थता
और अप्रामाण्य इष्ट ही हे । वे सबके सब अप्रमाण हो जायें, इसमें हमारी हानि क्या है ? तो इस
पर हमारा यह कहना है कि हे महामते चार्वाक निर्दोष उन वेद, पुराण आदि शास्त्रों का () इस
(>) अर्थात् तुम्हारे कहने के अनुसार तो ।
(&) अर्थात् नित्य, नैमित्तिक, प्राकृत ओर वैज्ञानिक ये जो चार तरह के प्रलय होते हैं उन्हें बतलानेवाले ।
(79) जो शिष्टसम्मत हैं ।
अर्थ में (#) अप्रमाण्य हो जाने पर “इस वन्ध्या सत्री ने सौ लड़के पैदा किये" इस वाक्य के समान
भोगलंपटता लोभ द्वेषादि हजारों दोषों से तुष्ट तुम्हारा वाक्य भी क्या प्रमाण होगा ? हमें तो उसकी
सम्भावना भी दुर्लभ है