Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
अवयवविभागात्मन्यवश्यंभाविनि क्षये ।
न कदाचिदनित्थं तज्जगदित्यप्यसंस्थितम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
पृथिवी आदि पंचभूतों के
सावयव होने से विभागों का अवसान हो जानेपर संयोग का विनाश ध्रुव है अतः अवयव विभाग
स्वरूप इस जगत् का जब विनाश अवश्यंभावी है तब इस दशा में “यह जगत् कभी इस
अविच्छिन्नप्रवाह से विपरित नहीं है, यह जैमिनीय मत अप्रतिष्ठित है-असंगत है