Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
आकाशात्मैव देहोऽयं भाति वासनया स्फुटः ।
तदभावात्तु नो भाति स्वप्नो बोधवतो यथा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उसीका पुनः उपपादन करते हैं /
हे श्रीरामजी, चिदाकाशरूप यह शरीर वासना के कारण ही स्पष्ट भासित हो रहा हे । वासना
के अभाव में तो ऐसे नहीं भासता, जैसे कि बोधवान् प्राणी को यानी जागे हुए जीव को स्वप्न नहीं
भासता