Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एतस्मिन्नन्तरे चक्षुर्व्योमस्थोऽहमथात्यजम् ।
ब्रह्मलोके महालोके प्रभातेऽर्कप्रभामिव ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, तपोलोकपर्यन्त जब समूचा प्रदेश प्रलयकालीन
एक महासागर के जल में डूब गया तब सत्यलोक के निकट आकाश में स्थित मैंने अपनी दृष्टि ऐसी
फेंकी, जैसे प्रातःकाल में सूर्यदेव अपनी प्रभा फेंकते हैं
सर्ग सन्दर्भ
अठहत्तरवाँ सर्ग समाप्त उन्नायीवों सर्ग प्रबोध द्वारा स्वप्न के बाध के समान, ऋषियों तथा देवताओं के समूह के सहित विधाता के निर्वाण का वर्णन।