Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
नाकाशमासीन्न दिगन्त आसीदधोऽपि नासीन्न तदूर्ध्वमासीत् ।
भूतं न आसीन्न च सर्ग आसीदासीत्परं केवलमेव वारि ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, ओर अधिक हम क्या कहें, सिर्फ यही
कह देना पर्याप्त है कि उस समय आकाश नहीं था, दिगन्त नहीं था, ऊपर नहीं था, नीचा नहीं था,
भूत नहीं था और न सर्ग था, किन्तु एकमात्र केवल जल ही जल विद्यमान था