Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
मेरुमन्दरकैलासविन्ध्यसह्यजलेचरः ।
गलितावनिपङ्कान्तर्लीनव्यालमृणालकः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें मेरु, मन्दर, कैलास, विन्ध्य और सह्य पर्वत तो जलचर-से हो गये और
उसमें जो पृथ्वी गल गयी थी, उसके कीचड़ में भीतर लीन शेषादि सर्प कमलदंड से मालूम हो रहे
थे