Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
चण्डवातकृतापूर्वजलौघकुलपर्वतैः ।
महाघुरघुरारावघर्घरोग्रमहारयः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रचण्ड पवन के द्वारा उत्पन्न जो अपूर्व जलौघ थे उनसे उसने
अपने अन्दर सातां कुलपर्वत की मानों रचना कर दी थी, इन रचित कुलपर्वतों से उदित हुए घुरघुर
महाध्वनि से घर्घर उग्र महाध्वनिपूर्वक उसका वेग असीम हो गया था