Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मृतार्धमृतदग्धार्धदग्धाङ्गैर्देवदानवैः ।
अन्योन्यदर्शनाद्वातवेल्लितैर्भ्रामितायुधम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों लोक में प्रलयकालीन वायु द्वारा वेल्लित हुए मरे, अधमरे, जले तथा अधजले
अंगों वाले देव ओर दानव, सबके ऊपर एक-सी विपत्ति आनेपर भी परस्पर वैरदुष्टि रखने के
कारण (7) एक दूसरे को देखकर मारने के लिए हथियार घुमाने लगे