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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

वहद्गिरिसरिद्व्यूहशिखरिद्वीपपत्तनम् । कल्पानिलघनक्षोभकृतपर्वतकुट्टनम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय पर्वतां के ऊपर से जो नदियों के समूह बह रहे थे, उनसे बड़े- बड़े पर्वत, द्वीप एवं नगर भी बह जाने लगे ओर कल्पान्त पवन के भयंकर क्षोभसे बड़े-बड़े पर्वत चूर्णित होने लग गये