Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सर्वान्तःशीतलः शुद्धो दुर्जनादिव सज्जनः ।
तस्यामपि दशायां तु मलयोऽमलसौरभः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, उस महाभयंकर प्रलयकालीन दशा मेँ भी मलयाचल तो अपने निर्मल सौरभ से
युक्त ही स्थित रहा । (इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है) उदार महापुरुष तो नाश के समय भी
अपने उत्तम गुण को नहीं छोड़ते