Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
आसन्क्ष्वेडाकुराक्षस्यो ज्वालाजालोज्ज्वलोर्ध्वजाः ।
भमद्भमिति भांकारैर्भीषणैर्भूरिभस्मभिः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
भंभं भकार भयंकर शब्दों से बहुत ज्यादा धूलि फेंकती हुई ये सभी दिशाएँ दुष्ट
राक्षसियों की तरह, परस्पर धूलि एवं जल फेंक-फेंककर क्रीडा करने में तत्पर हो गई, ये सभी
अपने मस्तक के ऊपर ज्वाला-समूहों से उज्ज्वल केश धारण किये हुए थीं यानी ज्वालाजालरूपी
चमकीले केश इनके माथेपर विराजमान थे