Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तत्सत्तया जगत्सत्ता तन्मृत्यैव जगन्मृतम् ।
यादृशी स्पन्दयमरुतोः सत्तैका तादृशी तयोः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
क्यों यह सब कुछ व्रह्मा ही हे 2 इस पर कहते हैं /
उसकी सत्ता से जगत् की सत्ता तथा उसके मरण से यानी अभाव से जगत् का मरण यानी
अभाव है । जैसी स्पन्द और वायु की सत्ता एक है वैसी ही ब्रह्मा और जगत् की सत्ता एक
है