Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
ऊर्ध्वं ब्रह्माण्डखण्डं तु समस्तमुरुमस्तकम् ।
ब्रह्माण्डप्रान्तरन्ध्रार्चिरस्य दीप्ता शिखोत्थिता ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्माण्ड के खण्ड का
सम्पूर्णं ऊर्ध्वभाग इसका विशाल मस्तक है । ब्रह्माण्ड के ऊर्ध्वप्रान्त के छिद्र प्रसिद्ध दीप्त
ज्योति ही इसकी प्रदीप्त शिखा खडी हे (५)