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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

जाग्रतः स्वप्नसंदृष्टयोद्धारभटिवेदनम् । यथा स्मृतिगतं नासन्न सत्तद्वदसौ स्थितः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे स्वप्न में देखे गये योद्धाओं के कोलाहल का ज्ञान जाग्रत्‌अवस्था में स्मृतिपथ में आया हुआ न तो अत्यन्त असत्‌ है और न सत्‌ ही है, वैसे ही जगत्‌ का यह प्रपंच स्थित है