Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यद्रष्टृदर्शनदृग्दृशः ।
अर्थान्तरस्वभावेन तिष्ठन्त्यनुदिताभिधाः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी समय यद्यपि उसमे आवश्यक देश, काल आदि के विभायों की कल्पना भी हो जाती
है / परन्तु काग् आदि की अभिव्यक्ति न होने से उसकी आभिधाशक्तिका अविभाव नहीं होता,
यह कहते हैं /
उसी समय देश, काल, क्रिया, द्रव्य, द्रष्टा, दर्शन, ज्ञान-साधन एवं ज्ञानरूप चक्षु आदि अन्य
अर्थो के स्वभाव से स्थित होते हैं, परन्तु अभिधाशक्ति का उदय नहीं रहता