Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
प्रकाशमणुमात्मानं पश्यंस्तदनुभावतः ।
उच्छूनतां चेतयते बीजमङ्कुरतामिव ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह
द्रष्टारूप आत्मा माया के बल से अपने को प्रकाशस्वभाव उक्त परमाणु रूप (परिच्छिन्नस्वरूप)
देखता हुआ उसका अनुभव करता है और उसी की सामर्थ्य से अपनी उपचयरूपता का ऐसे
संकल्प करता है, जैसे बीज अपनी अंकुरता का