Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
शान्ताशेषविशेषोऽहं तेन राघव संस्थितः ।
सन्नेवासन्निवातस्त्वमेवमेवास्व निर्ममः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, इस कारण मैं सभी तरह के विशेषणो से निर्मुक्त होकर स्थित
हूँ । मैं परमार्थतः सत् हूँ ओर व्यवहार में असत् देहादिरूप भी हूँ, आप भी मेरे जैसे परमार्थ
सद्रूप और व्यवहार में असत् देहादिरूप बनकर ममता शून्य हो स्थित हो जाइए