Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
भूमेरन्वभवन्भूरिदोलान्दोलनमद्रयः ।
भूकम्पलोलकैलासमेरुमन्दरकन्दराः ।
पेतुः कल्पतरून्मुक्ता रक्तस्तबकवृष्टयः ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
भूकम्प के कारण कैलास, सुमेरु ओर मन्दर की कन्दरा ओं में भारी चंचलता पैदा हो गई ओर कल्पतरु
वृक्ष से रक्तरूप पुष्पगुच्छों की वृष्टि होने लगी