Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्त्वा भगवान्ब्रह्मा ब्रह्मलोकजनैः सह ।
बद्धपद्मासनोऽनन्तसमाधानगतोऽभवत् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामभद्र, ऐसा मुझसे कहकर भगवान् ब्रह्माजी, ब्रह्मलोक में
रहनेवाले समस्त जनों के साथ, पहले पद्मासन लगाकर बैठ गये ओर फिर कभी न टूटनेवाली
समाधि में तत्पर हो गये
सर्ग सन्दर्भ
सत्तरवाँ सर्ग समाप्त इकहत्तरवों सर्ग॑ कल्पना के कारणभूत ब्रह्माजी के संकल्प का ज्यों -ज्यों विनाश होता गया, त्यो -त्योँ उनके कल्पित समस्त पदार्थों का प्रलय भी हो गया, यह वर्णन |