Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
यत्किंचित्स्वदतेऽन्तस्ते बुध्यस्वाबोधमुत्सृजन् ।
नासि त्वं चिरमप्यन्तः प्रेक्षितोऽपि न लभ्यसे ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण दृश्यप्रपंच का विवेक हो जाने पर साक्षिरूप शुद्ध ब्रह्म ही एकमात्र अवशिष्ट रहता हैं,
यही सम्पूर्ण वेदान्तों का रहस्य हैं, इस बात का स्रक्षेपरुप से पहले उपदेश देते हैं
जो कुछ अहंकार आदि तुम्हारे हृदय में दृश्यरूप से प्रकाशित हो रहा है वह सब तुम नहीं
हो। दृश्यों में ही कोई आत्मा है उसीको ढूँढ़कर मुझे प्राप्त करना चाहिए" इस तरह अपने
हृदय में विचारकर आत्मा का चिरकालतक यदि तुम अन्वेषण करोगे, तो भी तुम आत्मा को
प्राप्त नहीं करोगे, इसलिए दृश्यमात्रस्वरूप अज्ञान को छोड़कर तुम दृश्य प्रपंच के साक्षी आत्मा
अपने को समझो