Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
ततस्तस्य मया ब्रह्मंस्तच्छ्रुत्वा पावनं वचः ।
इदमुक्तं यथापृष्टं सुस्पष्टपदया गिरा ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्ड ने कहा : हे ब्रह्मन्, तदनन्तर विद्याधर के उन पवित्र वचन को सुनकर प्रश्न के
अनुसार मैंने सुस्पष्ट पदों से युक्त वाणी से यह उत्तर दिया
सर्ग सन्दर्भ
छठा सर्ग समाप्त सातवाँ सर्ग ब्रह्म की ही सत्ता है, जगत्रूपी दुःख की सत्ता है ही नहीं, यह सारा जगत् अज्ञान के कारण प्रतीत हुआ है तथा अहंकाररूपी बीज से यह जगदूपी वृक्ष उत्पन्न हुआ है- इन सबका वर्णन ।